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नई जीएसटी दर परिवर्तन से छोटे उद्यमियों और कारीगरों को राहत

नई जीएसटी दर परिवर्तन से छोटे  उद्यमियों और कारीगरों को राहत

जीएसटी दर परिवर्तन से जुड़े हालिया निर्णयों ने स्वदेशी उत्पादों, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य और ग्रामीण कारीगरों की आर्थिक गतिविधियों को सीधे रूप से प्रभावित किया है। नई संरचना का उद्देश्य सूक्ष्म उद्यमियों, हस्तशिल्प निर्माताओं, खादी उत्पादकों और कृषि आधारित वस्तुओं से जुड़े लोगों को राहत देना है।

हाथ से कते और बुने उत्पादों पर शून्य जीएसटी

नई व्यवस्था के तहत हाथ से कते और हाथ से बुने उत्पादों पर जीएसटी को शून्य कर दिया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य पारंपरिक कौशल, स्थानीय हस्तकला और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना है। यह कदम उन वर्गों को सीधे लाभ पहुंचाता है जो ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे पैमाने पर उत्पादन करते हैं।

ग्रामीण कारीगरों के लिए कर ढांचे में बदलाव

ग्रामीण कारीगरों द्वारा निर्मित साबुन, कॉस्मेटिक्स, पर्सनल केयर उत्पाद, खाद्य वस्तुएं, कृषि आधारित उत्पाद, प्रसंस्कृत सामग्री और हस्तशिल्प पर जीएसटी को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। यह सुधार जमीनी स्तर पर कार्यरत उद्यमियों की लागत को कम करता है और उनके उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाता है।

विभिन्न श्रेणियों में नए और पुराने जीएसटी दरों की तुलना

साबुन, हर्बल शैम्पू, दंतमंजन, फेस पाउडर, टॉयलेट क्लीनर, हर्बल मेहंदी, भृंगराज हेयर ऑइल, आयुर्वेदिक हेयर ऑइल, हेयर कंडीशनर और संबंधित वस्तुओं पर कर दरों में महत्वपूर्ण कमी की गई है। पूर्व में इनमें 12 प्रतिशत से 18 प्रतिशत तक की दरें थीं, जबकि अब इन्हें 5 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया है। कुछ वस्तुओं, जैसे तिल के तेल का काजल, पर जीएसटी को शून्य कर दिया गया है।

खाद्य, कृषि और प्रसंस्कृत वस्तुओं में भी कई उत्पाद जैसे खाखरा, हाथ से बने पापड़, अचार, मसाले और पारंपरिक खाद्य सामग्री पर कर दरों को कम किया गया है। लकड़ी के उत्पाद, मोमबत्तियां और अन्य हस्तशिल्प सामग्री पर भी जीएसटी को 12 प्रतिशत और 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।

खादी रेडीमेड परिधानों के लिए नई सीमा

खादी के रेडीमेड कपड़ों की कीमत सीमा में भी संशोधन किया गया है। पहले 1000 रुपये तक के परिधानों पर 5 प्रतिशत और इससे अधिक पर 12 प्रतिशत की दर लागू होती थी। अब 2500 रुपये तक के परिधानों पर 5 प्रतिशत की दर लागू होगी, जबकि 2500 रुपये से अधिक कीमत पर 12 प्रतिशत कर लगेगा। यह परिवर्तन खादी उत्पादों के उपयोग और वितरण को सरल बनाता है और उपभोक्ताओं को अतिरिक्त सुविधा प्रदान करता है।

स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन

नई कर संरचना का उद्देश्य स्थानीय उत्पादन, स्वदेशी वस्तुओं और ग्रामीण उद्योगों को मजबूत बनाना है। इन निर्णयों के माध्यम से स्थानीय कारीगरों, सूक्ष्म उद्यमियों और पारंपरिक उत्पादों से जुड़े लोगों को अधिक अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।